
कई बार मेरे सामने यह प्रश्न आया है की लोगो के जीवन मैं , उनके घर मैं या उनके काम करने की जगह मैं कोई ऐसा व्यक्ति है जिसको भूलने की बीमारी अर्थात डिमेन्षिया है, या फिर आल्झाइमर है. जिनके आस पास ऐसे लोग है, या ऐसा कोई भी व्यक्ति है, उनको बहुत ज़्यादा दुख होता है ऐसे व्यक्ति की हालत देख कर, और लगता है की बस इससे अच्छा तो भगवान उन्हे मृत्यु दे दे, तो शायद उनके कष्टों का अंत हो जाए. क्या ऐसा सोचना उचित है? क्या यह विचार एक डिमेन्षिया मरीज...