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आपके जीवन में आपको कई बार मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, नौकरी में, रिश्तों में, नये या पुराने लोगों के साथ, पढ़ाई में । जीवन की कोई भी स्थिति हो, आपका मनस, अहम, बुद्धि और चित्त उसपर प्रतिक्रिया करते हैं। यह प्रतिक्रिया आपको सुखद अनुभव दे सकती है, या आपको परेशान, चिंतित, ओर दुखद अवस्था में ले जा सकती है। जब आपका माइंड (मनस, अहम, बुद्धि, चित्त) जीवन की परिस्थितियों में प्रतिक्रियावश गाँठे बना लेता है, तब आपकी प्राणमया-कोशा में प्राण-शक्ति ठीक से संचारित नहीं हो पाती है। और जब बहुत लंबे समय तक आप अपनी मनोदशा सुधार...
कई बार मेरे सामने यह प्रश्न आया है की लोगो के जीवन मैं , उनके घर मैं या उनके काम करने की जगह मैं कोई ऐसा व्यक्ति है जिसको भूलने की बीमारी अर्थात डिमेन्षिया है, या फिर आल्झाइमर है. जिनके आस पास ऐसे लोग है, या ऐसा कोई भी व्यक्ति है, उनको बहुत ज़्यादा दुख होता है ऐसे व्यक्ति की हालत देख कर, और लगता है की बस इससे अच्छा तो भगवान उन्हे मृत्यु दे दे, तो शायद उनके कष्टों का अंत हो जाए. क्या ऐसा सोचना उचित है? क्या यह विचार एक डिमेन्षिया मरीज...